भारत रक्षा मंच का उद्देश्य बिल्कुल साफ है। हमें पहले बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करनी है और फिर अगर वह शरणार्थी है तो उन्हें शरणार्थी का कार्ड और यदि वह शरणार्थी नही है तो वर्क परमिट जारी किया जाय। यह हमारा पहला उद्देश्य है। दूसरा उद्देश्य है कि समान नागरिक संहिता भारत को एक सूत्र में पिरोने के लिये बनाया जाय। तीसरा उद्देश्य है कि हिन्दू को मुखर बनाया जाय तभी वह प्रबल राष्ट्र का निर्माण कर सकता हैं। अभी यह देखा जाता है कि कुछ भी हो वह प्रतिक्रिया नही करता। चौथा उद्देश्य यह है कि हिन्दू को जागृत की जरूरत है क्योंकि यही भारत की शक्ति व पहचान है , इसे प्रखर करने की आवश्यकता है। पांचवा हिन्दूओं में व गैर मुस्लिम लोगों के आत्मविश्वास को जगाना।

 

 

मुखर हिंदू                                                                    प्रखर राष्ट्र
(पंजी क्रमांक : 006-2011 नई दिल्ली) स्थापना वर्ष 2010

भारत रक्षा मंच के गौरवशाली 14 वर्ष

भारत रक्षा मंच की स्थापना 27 जून 2010 में भारत रक्षा मंच के संस्थापक और राष्ट्रीय संगठन मंत्री आदरणीय श्री सूर्यकांत जी केलकर द्वारा भोपाल में ‘बांग्लादेशी घुसपैठ एक राष्ट्रीय संकट’ विषय पर आयोजित एक परिचर्चा द्वारा हुई।
भारत रक्षा मंच, बांग्लादेशी घुसपैठ समस्या को ही केंद्र में रखकर उसके समाधान के लिए बना। ‘मुखर हिन्दू- प्रखर राष्ट्र’ भारत रक्षा मंच का ध्येय वाक्य है, भारत माता आराध्य हैं एवं छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे प्रेरणा स्रोत हैं।
एक एक करके अंदमान-निकोबार समेत देश के सभी राज्यों में संगठन का विस्तार हुआ व जिला, प्रदेश व राष्ट्रीय कार्यकारणियों का गठन भी हुआ है। मंच की संगठनात्मक गतिविधियाँ आरंभ हुई जिसमें सदस्यता, कार्यकर्ता सम्मेलन, अभ्यास वर्ग, प्रदेश व राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठकें व राष्ट्रीय अधिवेशनों से मंच की संगठनात्मक शक्ति एवं सक्रियता निरंतर बढ़ती रही।
मंच ने छत्रपति शिवाजी महाराज एवं वीर सावरकर जी के साथ ही असम के वीर लाचित बरफूकन और वीर विताराय जी की जयंतियाँ भी मनाई।
वर्ष 2011-12 में असम से बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों की पहचान करने के लिए संघर्ष आरंभ हुआ। जनजागृति, भारत सरकार के गृहमंत्रालय व असम सरकार को ज्ञापन व व्यक्तिगत मुलाकातों के माध्यम से एवं माननीय उच्चतम न्यायालय में याचिका के माध्यम से यह कार्य आरंभ हुआ। 2015 में बड़ी सफलता प्राप्त हुई, माननीय उच्चतम न्यायालय ने असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करने के लिए असम में हृक्रष्ट अपडेट करने की बात पर सरकार को शीघ्र कार्यवाही करने के आदेश दिये।
2016 से बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान के लिए हृक्रष्ट की प्रक्रिया असम में जोरों से शुरू हुई जिसमें मंच के अधिकारी प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखकर निष्पक्ष प्रक्रिया हो इस पर ध्यान दे रहे थे।
बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठ पर जन-जागरण हेतु देश के अनेक स्थानों पर सेमीनार, प्रेस वार्ता, पर्चा वितरण, धरना प्रदर्शन, जन-जागरण यात्राएँ आदि आयोजित कर ज्ञापन सौंपे गए। इसमें मध्यप्रदेश में वर्ष 2012 में सभी जिलों से गुजरती हुई एक जन-जागरण यात्रा निकाली गई जो अत्यंत सफल रही व वर्ष 2017 में दिल्ली के जंतर मंतर पर दिया गया धरना भी कई कारणों से अत्यंत महत्त्व का रहा।
जब मंच ने यह काम शुरू किया तो अनेक लोग भारत रक्षा मंच का उपहास उड़ाते थे कि मंच एक हारी हुई लड़ाई लड़ रहा है। जिस देश में करोड़ों बांग्लादेशी घुसपैठिए हों, जहाँ की सरकारें व राजनीतिक दल घुसपैठियों के वोटों की लालच में उनको पोषण और संरक्षण देती हों, जहाँ का भ्रष्ट तंत्र कुछ रूपयों की लालच में उन्हें भारतीय नागरिकों को दिए जाने वाले पहचान पत्र उपलब्ध करवाता हो वहाँ भारत रक्षा मंच कैसे इसका समाधान करेगा।
पर भारत रक्षा मंच इस काम में लगा रहा इसमें सबसे बड़ी चुनौती थी रोजाना होने वाली घुसपैठ को रोकना, आए हुए घुसपैठियों में जो हिन्दू हैं वो बांग्लादेश से प्रताडि़त होकर अपनी जान व धर्म बचाने के लिए आए हैं उन्हें भारतीय नागरिकता कैसे मिले इस पर काम करना और देश में मौजूद बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान हो यह सुनिश्चित करना
असम में बोड़ो जनजाति के लोगों को मंच ने समझाया कि असमिया गैर असमिया की समस्या से बड़ी समस्या भारतीय व अभारतीय की समस्या है।
भारत रक्षा मंच के प्रयासों व 2014 में बनी राष्ट्रवादी केंद्र सरकार के संकल्प से आज भारत बांग्लादेश के बीच सीमा का सही रेखांकन कर तारबंदी का काम पूरा हो गया, सीमा सडक़ें बन गई, सीमा सुरक्षा चौकियाँ स्थापित हो गई हैं, लेजर कैमरे लग गए व पलड लाईट्स लग गई हैं जिससे रोजाना होने वाली घुसपैठ, गौ तस्करी, महिलाओं की तस्करी, मादक पदार्थ- हथियारों व नकली नोटों की तस्करी बहुत बड़ी मात्रा में नियंत्रित हो गई है।
केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून ष्ट्र्र देश में लागू करके देश में आए हुए हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी व ईसाई शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का मार्ग प्रशस्त कर दिया जो भारत रक्षा मंच की एक प्रमुख मांग थी।

महज 10 वर्षों की कालावधि में भारत रक्षा मंच के प्रयासों व केंद्र सरकार की संकल्प शक्ति के कारण वह काम संभव हुआ है जो लोगों को असंभव लगता था और जिसका लोग उपहास उड़ाते थे। आज तो देश को यह विश्वास होने लगा है कि घुसपैठियों की पहचान भी की जा सकती है और उन्हें देश से बाहर भी निकाला जा सकता है। हमारी माँग है भारत सरकार से कि घुसपैठ विरोधी एक कठोर कानून देश में बनाया जाए तथा घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर निकाला जाए और यदि कुछ कारणों से बाहर निकालना सम्भव न हो तो देश में आ चुके घुसपैठियों को वर्क परमिट लेने के लिए बाध्य किया जाए।
इन माँगों के अलावा भारत रक्षा मंच ने जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने, समान आचार संहिता लागू करने, जम्मू-कश्मीर से धारा 370 व आर्टिकल 35- ्र समाप्त करने, अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनाने, तीन तलाक की कुप्रथा समाप्त करने, हिंदू मंदिरों मठों व न्यासों की आमदनी को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने, शिक्षा का भारतीयकरण करने, संवैधानिक रूप से भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने आदि की माँग भी की।
हमें प्रसन्नता है कि वर्ष 2014 व वर्ष 2019 में केंद्र में बनी राष्ट्रवादी सरकार ने हमारी अनेक मांगों जैसे जम्मू-कश्मीर से धारा 370 व आर्टिकल 35-्र समाप्त करने, अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनाने, नागरिकता संशोधन कानून (ष्ट्र्र) लागू करना, असम में घुसपैठियों की पहचान करना आदि पर निर्णायक कदम उठाकर काम पूरे कर दिए हैं व कुछ मामलों से सकारात्मक प्रगति हुई है।
हलाल अर्थव्यवस्था एक समांतर अर्थव्यवस्था के रूप में भारत में उभर रही है। इससे देश की मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट मंडरा रहा है। इस हलाल व्यवस्था को एक प्रकार से गैर मुसलमानों पर थोपा जा रहा है जिसका भारत रक्षा मंच विरोध करता है। जनजागृति और आवश्यकता पडऩे पर जन आंदोलन द्वारा इस हलाल पद्धति को इस्लाम के अनुयायियों के अलावा किसी अन्य व्यक्तियों पर न थोपा जाये यह माँग लेकर भारत रक्षा मंच आगे बढ़ेगा।
हिन्दुओं के मुखर बनने से ही हम एक प्रखर राष्ट्र की स्थापना कर सकते है। इसलिये हिंदुओं का आत्मविश्वास बढ़ाना, उन्हें बौद्धिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का काम भारत रक्षा मंच निरंतर कर रहा है।
बांग्लादेशी मुस्लिम की देश में घुसपैठ से बिगड़ते हुए सामाजिक, जनसांख्यिक और आर्थिक संतुलन से जो राष्ट्रीय संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है उसको सुधारने के प्रयास भारत रक्षा मंच के द्वारा निरंतर किए जा रहे हैं।

हमारी माँगें.. हमारा संकल्प-

  • – घुसपैठियों की पहचान के लिए हृक्रष्ट का अपडेशन पूरे देश में हो।
  • – जनसंख्या नियंत्रण कानून बने ।
  • – समान आचार संहिता लागू की जाये।
  • – हिंदू मंदिरों मठों व न्यासों की आमदनी सरकारी नियंत्रण से मुक्त हो ।
  • – शिक्षा का भारतीयकरण हो ।
  • – संवैधानिक रूप से भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाए।
  • इन माँगों को लेकर भारत रक्षा मंच अपना संघर्ष तेज करेगा व इन माँगों से संबंधित सरकार व प्रशासन की निर्णायक शक्तियों पर जन दबाव व कानूनी दबाव बढ़ाने के लिए भारत रक्षा मंच संकल्पित है।

 

वन्दे मातरम

माँ भारती हम सबका मार्ग प्रशस्त करे।

– सुर्यकान्त केलकर जी

राष्ट्रीय संयोजक ः भारत रक्षा मंच